शालिग्राम शिला की पूजा की महिमा – श्रीमद् पद्म पुराण
महाराज रत्नग्रीव बड़े बुद्धिमान् और जितेन्द्रिय थे, वे स्थान-स्थान पर दीनों, अंधों, दुःखियों तथा पंगुओं को उनकी इच्छा के अनुकूल…
महाराज रत्नग्रीव बड़े बुद्धिमान् और जितेन्द्रिय थे, वे स्थान-स्थान पर दीनों, अंधों, दुःखियों तथा पंगुओं को उनकी इच्छा के अनुकूल…
** मास की पहली तिथि को प्रतिपदा कहते हैं। यह तिथि मास में दो बार आती है। पूर्णिमा के बाद…
छठ पूजा – सुमन्तु मुनि बोले – राजन्! अब आप भगवान् सूर्य को अत्यन्त प्रिय सूर्यषष्ठी व्रत के विषय में…
श्री शिव पुराण माहात्म्य अध्याय – 1 – शौनक जी के साधन विषय प्रश्न करने पर सूत जी का उन्हें…