श्रीराम के मंत्रों का पुरश्चरण कैसे करते हैं?

सनकादि ऋषियों ने हनुमान जी से पूछा – आप श्रीराम मन्त्रों के पुरश्चरण का विधान बताइये।

हनुमान् जी ने बताया – नित्य त्रिकाल स्नान करे। दूध फल मूल आदि भोजन करो। केवल दूध ही पिये। अथवा यज्ञ के अन्नों का ही भोजन करे। ब्रह्मचर्य आदि जिस आश्रम में ही उस की विधि का निर्वाह करते हुये भोजन के ६ रसों का त्याग कर दे। वाणी कर्म मन से स्त्री संसर्ग से दूर रहकर पवित्र रहे। गुरु में आस्था कर, पृथ्वी पर सोने वाला, कामना रहित, ब्रह्मचारी होकर स्नान पूजा जप, ध्यान, होम, तर्पण में तत्पर रहे।


गुरु की शिक्षा के अनुसार अन्यत्र से मन हटाकर, श्री राम जी का ध्यान करे। सूर्य – चंद्र अर्थात दिन रात, गुरु दीपक, गौ ब्राह्मण के समीप ही रहे। श्रीराम के सम्मुख मंत्र के अर्थ का चिंतन करते हुए मौन ही रहे। व्याघ्र चरम के आसान पर स्वस्तिक आदि आसन मुद्रा से बैठ जाए।


तुलसी-पारिजात-बेल नृक्ष के नीचे या समीप बैठाकर साधक कमलाक्ष, तुलसी या रुद्राक्ष माला से भातृका अक्षित मंत्र जप करना चाहिए। मानसिक जप श्रेष्ठ है। मंत्र के जितने आकार हों उतने लाख जप करने पर पुरश्चरण होता है।


जप के बाद मंत्र संख्या का दशांश, हवन, पायस या गौघृत से करना चाहिए। हवन का दशांश तप्रण उसका दशांश, मार्जन उसका दशांश, ब्राह्मण भोजन कराना चाहिए।

फिर मूल मंत्र से विधिवत पुष्पांजलि देना चाहिए। इस प्रकार मंत्र सिद्ध हो जाता है और जापक जीवनमुक्त हो जाता है।


युवा को जैसे उत्तम वधू चाहती है उसी प्रकार अणिमा आदि सिद्धियां साधक को प्राप्त हो जाती है। किन्तु सांसारिक कार्यों की सिद्धि के लिए या आपत्ति निवारण के लिए राम मन्त्र का प्रयोग करना उचित नहीं है, मोक्ष साधना के लिए है इसका अनुष्ठान करना चाहिए।


यदि सांसारिक कार्य सिद्ध करना हो तब तो राम के सेवक मुझ हनुमान का स्मरण करना चाहिए।


मुनीश्वरों! जो नित्य राम का स्मरण करता है, भक्तिभाव से मन्त्र जप करता है उसकी अभीष्ट सिद्धि के लिए मैं सदा तत्पर रहता हूँ। राघव के भक्तों को मैं अभीष्ट वर प्रदान करता रहूंगा। क्योंकि रामकार्य करने के लिए मैं सदा सावधान रहता हूँ।


स्रोत – श्री रामरहस्योपनिषद् चतुर्थाध्याय


FAQs –

मंत्र पुरश्चरण कैसे करें?

किसी योग्य गुरु से मंत्र की दीक्षा लेना आवश्यक है। बिना गुरु की अनुमति से पुरश्चरण करना अधूरा है। पुरश्चरण का नियम है: जितने अक्षर मंत्र में हों, उतनी लाख बार उसका जप, यदि मंत्र में 8 अक्षर हैं, तो 8 लाख जप करने होंगे। किसी विशिष्ट देवता के मंत्र का पुरश्चरण करना चाहते हैं, तो उनके अनुकूल नियमों का पालन करें

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