श्रेणी: रामायण
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पक्षीराज गरुड़जी फिर प्रेम सहित बोले- हे कृपालु! यदि मुझ पर आपका प्रेम है, तो हे नाथ! मुझे अपना सेवक जानकर मेरे सात प्रश्नों के…
तुलसीदासजी कहते हैं – इस कलिकाल में योग, यज्ञ, जप, तप, व्रत और पूजन आदि कोई दूसरा साधन नहीं है। बस, श्री रामजी का ही…
काकभुशुण्डि जी गरुड़ जी से कहते हैं कि – जो आपने मुझ से शुकदेवजी, सनकादि और शिवजी के मन को प्रिय लगने वाली अति पवित्र…
पक्षीराज गरुड़जी फिर प्रेम सहित बोले – हे कृपालु! यदि मुझ पर आपका प्रेम है, तो हे नाथ! मुझे अपना सेवक जानकर मेरे सात प्रश्नों…
वाल्मीकि रामायण – सुन्दरकांडम – एकोनत्रिंशः सर्ग (Sarga 29) शुभ शकुन संकेत– जिस समय दुखियारी , हर्ष शून्य, संतप्त और निंदारहित सीता जी मरने की…
श्री सीतारामचंद्राभंयम नमः – एकोनसप्ततितम : सर्ग: भरत को दुःखी देख मित्रो द्वारा प्रसन्न करने का प्रयास, तथा उनके पूछने पर अपने देखे हुए भयंकर दुःस्वप्न…
श्री राम और हनुमान का मिलन अद्रभुत रामायण के अनुसार जिसमे श्री राम महावीर को चतुर्भुजरूप दिखाते है और सांख्ययोग अतिसूक्ष्मज्ञान का वर्णन करते है।…
इस प्रसंग (माता सीता द्वारा सहस्त्रवदन रावण का वध) का वर्णन अदभुत रामायण में है. ये संस्कृत भाषा में रचित 27 सर्गों का काव्य विशेष…
हनुमान जी की पूँछ – समुद्र ने श्री राम को सेतु बनाने का आग्रह किया और राम को नमस्कार करके समुद्र अदृश्य हो गए। और…
श्रीरामचन्द्रो विजयतेतराम् श्री हनुमान जी जब सीता माता से मुद्रिका लेकर जब उनका बताने के लिए लंका से वापस लौटने लगे, तब लौटते समय उत्तर…
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