तृष्णा किसे कहते है? योगवशिष्ठ
श्रीरामचन्द्रजी कहते हैं – मुनीश्वर ! चेतन जीवरूपी आकाश में हृदय के अज्ञानान्धकार से परिपूर्ण दुस्तर तृष्णारूपिणी रात्रि का सहारा…
श्रीरामचन्द्रजी कहते हैं – मुनीश्वर ! चेतन जीवरूपी आकाश में हृदय के अज्ञानान्धकार से परिपूर्ण दुस्तर तृष्णारूपिणी रात्रि का सहारा…