संत और असंत का मर्म क्या है?
पक्षीराज गरुड़जी फिर प्रेम सहित बोले- हे कृपालु! यदि मुझ पर आपका प्रेम है, तो हे नाथ! मुझे अपना सेवक…
पक्षीराज गरुड़जी फिर प्रेम सहित बोले- हे कृपालु! यदि मुझ पर आपका प्रेम है, तो हे नाथ! मुझे अपना सेवक…
परमात्मा अर्थात परम आत्मा को ही सत चित आनंद (Sat Chit Aanad in Hindi) कहा जाता है। परमात्मा ही सच्चिदानंद…
भगवान कृष्ण को छप्पन भोग क्यों लगाते हैं? 56 भोग की कहानी – 56 भोग – एक बार ब्रज के लोग…
उद्दालक/ वाजश्रवस उपनिषद् युग के श्रेष्ठ तत्ववेत्ताओं में मूर्धन्य चिंतक थे। ये गौतम गोत्रीय अरुणि ऋषि के पुत्र थे और…
यहाँ हम जानेगे की आखिर द्रोणाचार्य ने सिर्फ अर्जुन को ही महान धनुर्धर क्यों बनाया? इसके लिए हम शुरुआत करते…
पिछले तृतीय अध्याय में आपने पढ़ा– नारद के द्वारा भक्ति के कष्ट का निवारण का उपाय श्रीमदभागवत – चौथा अध्याय…
आपद्धर्म (=आपद्+धर्म) का अर्थ है विवशता या आपातकल में धर्म से हटकर थोड़ा बहुत कार्य करना, जिसे आपदा में धर्म…
जब अर्जुन 12 वर्ष का वनवास भोग रहे थे, उस दौरान उनके 3 विवाह होते हैं. पहला उलूपी जोकि नाग…
आसक्ति का अर्थ – इच्छाओं की तीव्रता अर्थात विषयो की तीव्र इच्छा ही आसक्ति है। आसक्ति से काम, क्रोध, लोभ,…
भाव,” “अभाव,” “प्रभाव,” “दुर्भाव,” “समभाव,” “दुष्प्रभाव,” “भेदभाव,” और “कुप्रभाव” हिन्दी शब्द हैं जिनका अर्थ निम्नलिखित है – भाव (expressions) –…