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संकल्प, विकल्प और निर्विकल्प किसे कहते है?

विकल्प –

कल्पना कीजिए, आप अपने पसंदीदा OTT प्लेटफॉर्म पर एक फिल्म देखने का मन बनाते हैं। आप ऐप खोलते हैं और आपके सामने सैकड़ों, शायद हजारों फिल्मों की एक सूची आ जाती है। क्या देखें? एक्शन, कॉमेडी, या थ्रिलर? आधा घंटा स्क्रॉल करने के बाद, आप थक कर ऐप बंद कर देते हैं और कुछ भी नहीं देखते। यह जानी-पहचानी स्थिति “विकल्प” का सबसे सटीक उदाहरण है। विकल्प, यानी Option या Choice, हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग है।

यह जानी-पहचानी स्थिति “विकल्प” का सबसे सटीक उदाहरण है। विकल्प, यानी Option या Choice

विकल्प का सीधा-सरल अर्थ –

“विकल्प” शब्द संस्कृत की दो जड़ों से मिलकर बना है: वि + कल्प।

वि (Vi): इस उपसर्ग का अर्थ है ‘भिन्न’, ‘अलग’, या ‘विशेष’।

कल्प (Kalpa): इसका अर्थ है ‘विचार’, ‘रचना’, या ‘नियम’।

जब हमारे पास किसी कार्य को करने या किसी निर्णय पर पहुंचने के लिए एक से अधिक रास्ते या संभावनाएं होती हैं, तो उन्हें विकल्प कहा जाता है। विकल्पों का होना एक दोधारी तलवार की तरह है। यह विचार हमारे मन में लगातार संदेह पैदा कर सकता है। नतीजतन, हम किसी एक निर्णय पर टिके नहीं रह पाते। एक विकल्प चुनने के बाद, यह सोचकर पश्चाताप हो सकता है कि कहीं अन्य विकल्प बेहतर तो नहीं थे। यह हमें अपने वर्तमान निर्णय का आनंद लेने से रोकता है। विकल्पों का होना जीवन का एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन उनके जाल में फंसना बुद्धिमानी नहीं है। इस तरह के काल्पनिक विकल्प हमारे मन को सत्य से दूर ले जाते हैं और भ्रम पैदा करते हैं। योग का लक्ष्य इन सभी मानसिक वृत्तियों को शांत करके निर्विकल्प (विकल्प रहित चेतना) की स्थिति तक पहुंचना है।

संकल्प –

हर नए साल, हर जन्मदिन, या हर सोमवार को हम अक्सर खुद से कुछ वादे करते हैं – “कल से पक्का जिम जाऊँगा,” “इस बार गुस्सा नहीं करूँगा,” “अब से पैसे बचाऊँगा।” ये इरादे कुछ दिन तो जोश में रहते हैं, लेकिन फिर धीरे-धीरे धुंधले पड़ जाते हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है?

शायद इसलिए क्योंकि हम ‘इरादा’ या ‘योजना’ तो बनाते हैं, लेकिन “संकल्प” नहीं लेते। संकल्प सिर्फ एक भारी-भरकम हिंदी या संस्कृत का शब्द नहीं है। यह एक अत्यंत शक्तिशाली मानसिक और आत्मिक प्रक्रिया है जो एक साधारण इच्छा को एक अटल निश्चय में बदल देती है।

संकल्प का वास्तविक अर्थ –

संकल्प” शब्द संस्कृत के दो मूल शब्दों के मेल से बना है: सम् + कल्प।
सम् (Sam): इसका अर्थ है ‘उत्तम’, ‘पूर्ण’, ‘एक साथ’ या ‘सही ढंग से’। यह किसी भी चीज़ में समग्रता और पूर्णता का भाव जोड़ता है।
कल्प (Kalpa): इसका अर्थ है ‘विचार’, ‘इरादा’, ‘नियम’ या ‘रचना’।
संकल्प का शाब्दिक अर्थ है – ‘एक उत्तम या पूर्ण इरादा’। यह मन और हृदय से मिलकर लिया गया एक ऐसा निर्णय है जो पूरी चेतना के साथ किया जाता है। संकल्प लेते समय अगर किसी को साक्षी बना लिया जाये, जैसे की सर्वशक्तिमान भगवान् को तो संकल्प की पूर्णता सिद्दी प्रदायक होती है।

निर्विकल्प का अर्थ –

निर्विकल्प शब्द दो हिस्सों से मिलकर बना है: निर् + विकल्प।

निर् (Nir): यह एक उपसर्ग है जिसका अर्थ है ‘बिना’, ‘रहित’ या ‘अभाव’।

विकल्प (Vikalp): इसका अर्थ है ‘चुनाव’, ‘भेद’, ‘दूसरा विचार’ या ‘मन का उतार-चढ़ाव’।

इस तरह, निर्विकल्प का शाब्दिक अर्थ है – ‘विकल्प से रहित’ या ‘बिना किसी चुनाव के’।

निर्विकल्प होना केवल विकल्पों का न होना नहीं है, बल्कि यह मन की उस परम स्वतंत्रता को पाना है जहाँ चुनाव करने का बोझ ही समाप्त हो जाए। यह एक ऐसी अटूट और अविचल अवस्था है जहाँ व्यक्ति अपने सच्चे स्वरूप में स्थित हो जाता है—शांत, स्थिर और पूर्ण। यह संदेह से निश्चय तक और अनेकता से एकता तक की यात्रा का अंतिम पड़ाव है।

संकल्प से हम अपने निर्णय में स्थिर रहते हैं, विकल्प हमें सोचने के अवसर देते हैं, लेकिन कभी-कभी भ्रम में डालते हैं, और निर्विकल्प हमें पूर्ण शांति और स्थिरता की स्थिति तक ले जाता है।

 

 

 

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