आपने देखा होगा कि सभी मंदिरो पर विशेष ध्वजा लहराई जाती है। यदि मंदिर के बाहर किसी देवी या देवता का नाम न लिखा हो तब भी आप उस ध्वजा को देखकर उस देवालय के देवता के बारे में जान सकते हैं।
What is the Dharma Dhwaja and what is its significance?
किस देवता की कौन सी ध्वजा? –
जिस प्रकार सभी देवी-देवताओं के अपनी-अपनी एक सवारी और अपने-अपने अस्त्र होते हैं, उसी प्रकार उनसे संबंधित ध्वज भी अलग-अलग होते हैं. जिन्हें दूर से ही देखकर आप उस देवता के धाम को पहचान सकते हैं.
भगवान गणेश जी –
प्रथम पूजनीय माने जाने वाले गणपति की ध्वजा का रंग दो तरह का करते है, केसरियां अर्थात नारंगी और द्वितीय पीला। आपने देखा होगा गणेश को हनुमान जी की तरह केसरियां रंग का चोला भी चढ़ाया जाता है। उसमें उनकी सवारी मूषक का चिन्ह बना हुआ होता है। गणपति की ध्वजा को मूषक ध्वज कहा जाता है।
भगवान शिव –
भगवान शिव के लिए भी सफेद रंग की ध्वजा लगाई जाती है, सफेद रंग पवित्रता, शांति और तपस्या का प्रतीक है। और इसे वृषभ ध्वजा कहते हैं. इसमें उनकी सवारी बैल अंकित होता है. शिव की ध्वजा को नंदी ध्वज भी कहा जाता है।
भगवान सूर्य –
सूर्य की ध्वजा तेज और ऊर्जा का प्रतीक है। इसे अरुण ध्वज भी कहा जाता है।
भगवान हनुमान –
हनुमान जी के लिए केसरिया ध्वजा लगाई जाती है. जिसमें अक्सर उनकी तस्वीर के साथ गदा अंकित होता है. केसरिया रंग बल, पराक्रम और त्याग का प्रतीक है। हनुमान की ध्वजा पर गदा का चिन्ह होता है।
भगवान जगन्नाथ –
भगवान जगन्नाथ जी के मंदिर में अर्ध चंद्र ध्वजा फहराई जाती है.
देवी दुर्गा –
हिंदू मान्यता के अनुसार देवी दुर्गा के मंदिरों में सिंह ध्वजा लगाई जाती है. यह लाल रंग की होती है. लाल रंग शक्ति और विजय का प्रतीक है। दुर्गा की ध्वजा को सिंह ध्वज भी कहा जाता है।
भगवान विष्णु –
जगत के पालनहार कहलाने वाले भगवान विष्णु की ध्वजा पीले रंग की होती है, पीला रंग सतोगुण, धर्म और शांति का प्रतीक है। जिसमें उनकी सवारी गरुण का चिन्ह बना रहता है. विष्णु की ध्वजा को गरुड़ ध्वज भी कहा जाता है।
ब्रह्मा जी –
परमपिता ब्रह्मा जी की ध्वजा को हंस ध्वजा कहते हैं.
भगवान कार्तिकेय –
भगवान कार्तिकेय जी की ध्वजा को मयूर ध्वजा कहते हैं. नीला रंग वीरता और आकाशीय शक्ति का प्रतीक है। उनकी ध्वजा पर मोर का चिन्ह होता है।
धर्म ध्वजा कैसे कार्य करता है?
अगर धर्म ध्वजा को देखकर दूर से भी प्रणाम कर लिया जाता है तब भी आप उस देवकृपा के अंदर आ जाते है, अर्थात उनकी शरण में आ जाते है, और भगवान् अपनी शरणागत की सदैव रक्षा करते है, जैसे की गज और ग्राह की कथा में अपने सुना होगा कि हाथी अंत समय में श्री विष्णु भगवान की शरण ले लेता है और श्रीविष्णु भगवान् नंगे पैर, विनिता नंदन गरुड़ पर सवार हो, अपने भक्त को बचाने के लिए आ जाते है।
मंदिर के शिखर पर लगी ध्वजा सकारात्मक और दिव्य दैवीय शक्ति का प्रतीक होती है. यदि आप किसी कारणवश किसी देव स्थान के भीतर जाकर उसमें प्रतिष्ठित देवी या देवता के दर्शन न कर पाएं तो उसके ध्वज और शिखर का दर्शन करके पूरा पुण्यफल प्राप्त कर सकते हैं.
किसी भी देश का राजा या उस देश के वासी आज भी ध्वज के नीचे अर्थात शरण में रहते है। जैसे भारत के सभी लोग तिरंगे ध्वज के नीचे रहते है।
जितने क्षेत्र में धर्म ध्वजा दिखती है, उतने क्षेत्र में नकारात्मक ऊर्जाये प्रवेश करने से डरती है।
जो धर्म ध्वजा को नहीं मानता वह?
जो धर्म ध्वजा को नहीं मानता, वह दंड का अधिकारी होता है, ठीक वैसे ही जैसे भारत में रहकर, भारत के ध्वज को न मानने वाले को देशद्रोही कहा जाता है।
इसलिए जो धर्म ध्वजा का अपमान करता है, उसका दंड उसे पीढ़ियों तक भुगतना पढ सकता है। उसके कुल में नीच प्रवृत्ति की आत्माये शरीर प्राप्त करती है, जो जुआ, शराब, बलात्कार , चोर आदि निकल सकती है, जिसके कारण उस कुल का नाश हो जाता है।
डिस्क्लेमर – यह जानकारी लेखक (Mahapuran Blog) के स्वयं के विवेक के अनुसार है, जिसमे सुधार किया जा सकता है।






